May 30, 2024

“परीक्षा पे चर्चा” कार्यक्रम में शामिल Bhopal की छात्रा ने Pm मोदी से पूछे कुछ सवाल

"परीक्षा पे चर्चा" कार्यक्रम

“परीक्षा पे चर्चा” कार्यक्रम में शामिल Bhopal की छात्रा ने Pm मोदी से पूछे कुछ सवालआज दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में स्टूडेंट्स से “परीक्षा पे चर्चा” कार्यकर्म में पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिसमे दो घंटे बच्चो से जीवन में तनाव जैसे कई टॉपिक्स पर बातचीत की और कई सारे टिप्स भी दिए,उसी कार्यक्रम में राजधानी भोपाल से एक छात्रा रितिका गोडके इस कार्यकर्म का हिस्सा बनी और उसने भी पीएम मोदी से पूछा-हम अधिक से अधिक भाषाएँ कैसे सीखे तो मोदी ने जवाब देते हुए अपने पुराने जमाने के किस्से सुनाये!

“परीक्षा पे चर्चा” कार्यक्रम में शामिल Bhopal की छात्रा ने Pm मोदी से पूछे कुछ सवाल

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प्रधानमंत्री ने दिए ऐसे जवाब

भारत विविधताओं से भरा हुआ देश है। हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि हमारे पास सैकड़ों भाषाएं हैं।हजारों बोली हैं। यह हमारी समृद्धि है। हमें अपनी इस समृद्धि पर गर्व होना चाहिए।कोई विदेशी हमें मिल जाए और उसे पता चले कि आप इंडिया से हैं, अगर वह थोड़ा सा भी भारत से परिचित होगा- आपको नमस्ते बोलेगा। जैसे ही वो यह बोलेगा आपके कान सचेत हो जाते हैं। अपनापन महसूस होने लगता है कि एक विदेशी हिंदी बोलता है। कम्यूनिकेशन की बढ़ी ताकत है। इसका एक योगदान है। मन लगाकर के अपने अड़ोस-पड़ोस के राज्य के एक-दो भाषा सीखने में क्या जाता है।कोशिश करना चाहिए।

“परीक्षा पे चर्चा” कार्यक्रम में शामिल Bhopal की छात्रा ने Pm मोदी से पूछे कुछ सवाल

हम भाषा सीखते हैं, इसका मतलब बोलचाल के कुछ वाक्य सीख जाना ही नहीं है। हम वहां के अनुभवों का निचोड़ जो होता है, एक-एक भाषा की जब अभिव्यक्ति शुरू होती है, तो उसके पीछे हजारों साल की एक अविरक्त, अखंड, अविचल एक धारा होती है। अनुभव की धारा होती है। उतार-चढ़ाव की धारा होती है। संकटों का सामना करते हुए निकली हुई धारा होती है। तब जाकर के एक भाषा अभिव्यक्ति का रूप लेती है। हम जब एक भाषा को जानते हैं, तब आपको हजारों साल पुरानी उस दुनिया में प्रवेश करने का द्वार खुल जाता है। इसलिए बिना बोझ बनाए हमें भाषा सीखनी चाहिए।

“परीक्षा पे चर्चा” कार्यक्रम में शामिल Bhopal की छात्रा ने Pm मोदी से पूछे कुछ सवाल

पीएम ने कहा हमे हमारी संस्कृति पर गर्व होना चाहिए

हमें गर्व करना आना चाहिए। अब देखिए, बड़े आराम से उत्तर भारत का व्यक्ति डोसा खाता है। सांभर भी बड़े मजे से खाता है। तब तो उसको उत्तर-दक्षिण कुछ नजर नहीं आता। दक्षिण में जाइए आप, तब वहां पराठा-सब्जी भी मिल जाती है, पूरी भी मिल जाती है। बड़े चाव से लोग खाते हैं। कोई तनाव-रुकावट नहीं होती।हर किसी को कोशिश करना चाहिए कि मातृभाषा के अलावा दूसरे राज्य की भाषा, कुछ सेंटेंस आने चाहिए। आप देखिएगा आपको आनंद आएगा, जब दूसरे राज्य के व्यक्ति से मिलोगे और दो वाक्य भी उसकी भाषा में बोलेगे, तो उसे अपनापन महसूस होगा।

“परीक्षा पे चर्चा” कार्यक्रम में शामिल Bhopal की छात्रा ने Pm मोदी से पूछे कुछ सवाल

बहुत साल पहले की बात है। जब मैं सामाजिक काम में लगा था। अहमदाबाद में एक मजदूर परिवार था। मैं कभी उनके यहां भोजन के लिए जाता था। वहां एक बच्ची कई भाषाएं बोलती थी। क्योंकि, वो मजदूरों की कॉलोनी थी। कोस्मोपॉलिटयन थी। उसकी मां केरल, पिता बेंगाल से थे। कोस्मोपॉलिटन होने की वजह से वहां हिंदी चलती थी। बगल का एक परिवार मराठी था। स्कूल गुजराती होती थी। मैं हैरान था वो 7-8 साल की बच्ची बंगाली, मराठी, मलयालम, हिंदी फर्राटेदार बोलती थी। घर में अगर पांच लोग बैठे हैं, इससे बात करनी है तो मलयालम में करेगी, इससे बात करने ही है तो हिंदी में करेगी, इससे बात करनी है तो बंगाली में करेगी…। उसकी प्रतिभा खिल रही थी। इसीलिए, मेरा आपसे आग्रह है कि हमें अपनी विरासत पर गर्व होना चाहिए। हर भाषा पर गर्व होना चाहिए।

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