Sunday, February 25, 2024
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कम लागत में होंगा तगड़ा मुनाफा,होंगी जबरदस्त पैदावार गरीब किसानों की सोई किस्मत जाग जाएंगी

कम लागत में होंगा तगड़ा मुनाफा हमारे भारत में कुसुमकी खेती को प्रमुख रूप से किया जाता है और इसे सनफ्लावर के नाम से भी जाना है और ये भारत में कुसुम की खेती करने वाले प्रमुख राज्यों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा और बिहार शामिल हैं। और हमारा भारत कुसुम की खेती करने के लिये सबसे बड़ा उत्पादक देश भी रहा है। और हमारे भारत में मुख्य रुप से कुसुम के फल की बीजों से निकाले गए तेल का इस्तेमाल भी किया जाता है।

कम लागत में होंगा तगड़ा मुनाफा,होंगी जबरदस्त पैदावार गरीब किसानों की सोई किस्मत जाग जाएंगी

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कुसुम की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी और बुबाई

कुसुम की खेती करने के लिए सबसे पहले 15 डिग्री का तापमान होंना बेहतर रहता है।और उसकी अच्छी पैदावार करने के लिए 20 से 25 डिग्री तक का तापमान होना जरुरी है।मिट्टी का पीएच मान 5 से 7 के बीच का होने जरुरी होता है। और इसकी बुबाई का उपयुक्त समय सितम्बर माह के अंतिम से अक्टूबर माह के प्रथम सप्ताह तक होती है।और यदि खरीफ सीजन में सोयाबीन की फसल बोई जाती है और तो कुसुम फसल बोने का उपयुक्त समय अक्टूबर माह के अंत तक का रहता है।और कुसुम की खेती में भुरभुरी मिट्टी जरुरी होती है।खेत को सबसे पहले मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई करनी जरुरी होती है।

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कुसुम की खेती उन्नत किस्में

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कुसुम की फसल की अच्छी पैदावार में उन्नत किस्मों का चयन करना होता है। कुसुम की कुछ उन्नत किस्में इस प्रकार है जैसे की के 65 – यह कुसुम की एक प्रजाति है, जो 180 से 190 दिन में पक जाती है। इसमें तेल की मात्रा 30 से 34 प्रतिशत तक होती है और इसकी औसत उपज 14 से 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है। और मालवीय कुसुम 305 – यह कुसुम की एक उन्नत किस्म है जो 155 से 160 दिनों तक पक्ति है। इस किस्म में तेल की मात्रा 37 प्रतिशत तक ही होती है। और ए 300 – यह किस्म 155 से 165 दिनों में पककर तैयार हो जाती है।

सिचाई और खाद का प्रयोग

कुसुम की एक फसल को 60 से 90 सेटीमीटर पानी की आवशयकता होती है। और कुसुम की खेती में अधिक सिंचाई की जरुरत नहीं है। और इसमें फसल अवधि में एक से दो बार हल्की सिंचाई करनी चाहिए। पहली सिंचाई बुआई के 50 से 55 दिनों पर और दूसरी सिंचाई 80 से 85 दिनों के अंतराल में की जनि चाहिए। कुसुम के पौधों में फूल निकलने की अवस्था में सिंचाई नहीं करनी चाहिए। जिन खेतों में उपयुक्त सिंचाई के साधन हो वहां नाइट्रोजन 60 किलोग्राम, फॉस्फोरस 40 किलोग्राम और पोटाश 20 किलोग्राम की मात्रा का इस्तेमाल करना चाहिए।

कुसुम फल और बीज से लाभ

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कुसुम के फल में कई प्रकार के औषधीय गुण पाएं जाते हैं। जिसमे की कुसुम का बीज, छिलका, पत्ती, पंखुड़ियां, तेल, शरबत सभी का उपयोग औषधि के रूप में किया जा सकता है। कुसुम के तेल का उपयोग भोजन में करने पर कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम रहती है एवं तेल से सिर दर्द में भी आराम मिलता है। कुसुम के फल खाने के फायदे निम्नलिखित है जैसे की कुसुम का फल डायबिटिक मरीजों के लिए बहुत ज्यादा लाभकारी होता है। और कुसुम का फल खाने से गंजेपन की समस्या को भी दूर किया जा सकता है। इस तरह से इस तेल के बहुत से फायदे होते है।

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